9 months ago

उजालों में जी लिया बहुत, अब थोड़ा अँधेरों में जीना चाहते हैं हम, शराफत कर ली बहुत अब थोड़ा बिगड़ना चाहतें हैं हम, सूरज भी क्या रौशन करेगा हमें जब सहरो

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